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नीतियां है लेकिन सही जानकारी न होने के चलते विमुक्त होने लगे किसान आने लगी कृषि में कमी

By नरेंद्र सिंह बिष्ट | 2026-05-25 (Updated: 2026-05-25)
कृषि
उत्तराखंड
पहाड़ी खेती
किसान
सरकारी योजनाएं
जैविक खेती
पलायन
नीतियां है लेकिन सही जानकारी न होने के चलते विमुक्त होने लगे किसान आने लगी कृषि में कमी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में घटती कृषि, किसानों की चुनौतियों और सरकारी कृषि नीतियों पर आधारित एक विस्तृत लेख।

पहाड़ों में कृषि में लगातार कमी

21वीं सदी में हम सभी आधुनिकता की ओर अग्रसर हैं, लेकिन पहाड़ों में कृषि में लगातार कमी देखी जा रही है। इसके प्रमुख कारणों में युवाओं का मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन, जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान, जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का अनिश्चित होना, खेतों का छोटा आकार और सिंचाई की कमी शामिल हैं।

  • युवाओं का शहरों की ओर पलायन

  • जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान

  • बारिश का अनिश्चित चक्र

  • सिंचाई सुविधाओं की कमी

  • खेतों का छोटा आकार

गांवों में बुजुर्गों के रहने के कारण भारी कृषि कार्य करना कठिन हो गया है। यदि किसी तरह खेती की भी जाए, तो जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे किसानों का मनोबल टूटता है और वे खेती छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

सीमित कृषि योग्य भूमि और आर्थिक चुनौतियां

ग्राम तोली, बागेश्वर के केशव गाड़िया जी के अनुसार पीढ़ियों में बंटवारे के चलते पहाड़ों में खेतों का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है। ढलानदार खेतों के कारण आधुनिक मशीनों का उपयोग भी संभव नहीं हो पाता।

  • सीमित कृषि योग्य भूमि

  • ढलानदार खेत

  • आधुनिक मशीनों के उपयोग में कठिनाई

  • लागत के अनुसार लाभ में कमी

पारंपरिक फसलों से किसानों को पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है, जिसके कारण लोग कृषि छोड़कर अन्य व्यवसायों और नौकरियों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

सरकारी नीतियों की जानकारी का अभाव

ग्रामीण आबादी को बनाए रखने के लिए समुदाय को सरकार द्वारा बनाई गई कृषि नीतियों की जानकारी होना आवश्यक है। हालांकि अक्सर देखा गया है कि जमीनी स्तर पर जानकारी का अभाव बना रहता है।

भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कई नई कृषि नीतियां लागू की गई हैं।

मुख्य कृषि नीतियां और योजनाएं

राष्ट्रीय कृषि नीति वर्ष 2000 में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से लाई गई थी। इसका लक्ष्य कृषि विकास दर को 4 प्रतिशत से अधिक करना, अनुबंध कृषि को बढ़ावा देना और निजी निवेश आकर्षित करना था।

  • राष्ट्रीय कृषि नीति

  • कृषि निर्यात नीति

  • विकसित कृषि संकल्प अभियान

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

  • राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन

  • पारंपरिक कृषि विकास योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जबकि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए ‘ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना चलाई जा रही है।

पारंपरिक कृषि विकास योजना देश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। उत्तराखंड कृषि नीति पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक खेती, पॉलीहाउस तकनीक और बागवानी को प्रोत्साहित करती है।

उत्तराखंड में कृषि सुधार और आधुनिक पहल

उत्तराखंड के किसानों को कृषि विभाग और जागरूकता अभियानों के माध्यम से आधुनिक कृषि की जानकारी दी जा रही है, हालांकि जमीनी स्तर पर अभी भी जागरूकता की कमी है।

  • सेब उत्पादन को बढ़ावा

  • कीवी खेती

  • ड्रैगन फ्रूट उत्पादन

  • मिलेट (मोटा अनाज) प्रोत्साहन

  • पॉलीहाउस निर्माण सहायता

  • ई-वाउचर और DBT सुविधा

सरकार किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है, जिससे सीमांत किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिल सके।

अधिक जानकारी कहां से प्राप्त करें

नवीन कृषि योजनाओं, लाइसेंस और दस्तावेज़ीकरण से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान अपने ब्लॉक कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या उत्तराखंड कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।

  • ब्लॉक कृषि कार्यालय से संपर्क करें

  • उत्तराखंड कृषि विभाग की वेबसाइट देखें

  • जागरूकता अभियानों में भाग लें

Conclusion

यदि किसानों तक सरकारी योजनाओं और कृषि नीतियों की सही जानकारी पहुंचे, तो भविष्य में पहाड़ों की कृषि को पुनर्जीवित किया जा सकता है।

नरेंद्र सिंह बिष्ट
नरेंद्र सिंह बिष्ट

नरेंद्र सिंह बिष्ट हल्द्वानी से जुड़े लेखक हैं जो ग्रामीण विकास, कृषि और उत्तराखंड के सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं।

लेखक लंबे समय से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, पलायन और किसानों की समस्याओं पर अध्ययन एवं जागरूकता कार्य कर रहे हैं।

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